August 15, 2022

Taad ka ped नारियल के समान ही होता है क्योंकि यह नारियल के पेड़ के समान ही लंबा और ऊंचा होता हैं लेकिन क्या Taad ka ped, नारियल के समान गुणकारी हैं ?क्या यह हमारे लिए लाभकारी होता है? आइए जानते हैं

 परिचय 

Taad ka ped की विशेष बात यह है कि क्या लंबा तो होता हैं परंतु इसमें कोई भी डालियाँ नहीं होती हैं। ताड़ के पेड़ के तानो से ही पत्तो की उत्पत्ति होती हैं। Taad ka ped औषधीय रूप से भी समान गुणकारी हैं। ताड़ के पेड़ की ऊंचाई लगभग 32 से 35 मीटर की होती हैं।

Taad ka ped एक विशाल वृक्ष होता हैं। ताड़ के पेड़ के फूल एकलिंगी होते हैं, और गुलाबी रंग के होते हैं या फिर पीले रंग के होते हैं। जो शरद ऋतु में आते हैं। इसके फलों का रंग हल्का काला होता हैं, जो पकने के बाद पीले रंग के हो जाते हैं कच्ची अवस्था में यह फल अंदर से नारियल के समान सफेद होते हैं और पकने के बाद यह गुदेदार और रेशेदार हो जाते हैं इसके फलों का स्वाद मीठा होता हैं और अंडाकार होते हैं

 Taad ka ped जो फल देता है वह नवंबर से जून के महीने में ही आते हैं क्योंकि Taad ka ped नवंबर से जून के महीने में ही फलता फूलता हैं। Taad ka ped का जो तना  होता है उसमें एक प्रकार का रस होता है जो उसके तानो को काट कर निकाला जाता है उसे ताड़ी कहते हैं।

ताड़ के पेड़ को दो भागों में विभाजित किया जाता है।

  1. नर और
  1. मादा

आइए जानते हैं नर और मादा ताड़ का पेड़ कैसा होता हैं –

  • नर Taad ka ped – ताड़ के पेड़ का नर वृक्ष उसे कहते हैं जिस पर सिर्फ फूल खिलते हैं फल नहीं आते।
  • मादा Taad ka ped – मादा ताड़ का पेड़ उसे कहते हैं।जिसमे केवल फल ही बस आते हैं फूल नही इन्हें इसी कारण दो भागों में विभाजित किया गया हैं।

ताड का तेल

जी हां ताड़ के पेड़ से तेल भी निकाला जाता हैं और इसका तेल वनस्पति के रूप में उपयोग में लाया जाता हैं। आइए जानते हैं इसके तेल का उपयोग कहां किया जाता हैं।

  • ताड़ के पेड़ का तेल उपयोग अधिक मात्रा में पश्चिम अफ्रीका के देशों में किया जाता हैं।
  • अफ्रीका के लोग इसके तेल का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए करते हैं।
  • ताड़ के पेड़ का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में भी किया जाता है इसका उपयोग मशीनों की ऑयलिंग करने के लिए किया जाता हैं।
  • ताड़ के तेल से साबुन को भी बनाया जाता है इसका उपयोग लीवर ब्रदर्स ने ‘सनलाइट साबुन’ और अमेरिकन पामोलिव ब्रांड के साबुन बनाने में किया हैं।
  • ताड के तेल में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नहीं होती हैं।
  • ताड़ के तेल में ग्लिसरोल भी नहीं पाया जाता हैं।
  • ताड़ के तेल में विटामिन ई की मात्रा सर्वाधिक पाई जाती हैं।
  • इसके तेल का रंग गहरा लाल होने के कारण स्कोर ताड़का लाल तेल भी कहते हैं।
  • ताड़ के तेल का उपयोग जैव डीजल बनाने के लिए भी किया जाता हैं जैव तेल का निर्माण पेट्रोल और डीजल में ताड़ का तेल मिल्कर बनाया जाता हैं।

फायदे 

  • यदि आपको आंखों की समस्या हैं तो आप ताड़ी का इस्तेमाल करके इससे निजात पा सकते हैं ताड़ी से बनाए हुए घी की एक दो बूंद आंखों में डालने से आंखों की बीमारी दूर हो जाती हैं।
  •  हैजा – अगर किसी को हैजा की बीमारी हो गई है तो वह ताड़ के मूल को चावल के पानी में पीसकर अपनी नाभि में इसका लेप करें इससे हैजा की समस्या दूर हो जाएगी।
  •  पेट में कीड़ों की समस्या – अक्सर बच्चों को यह समस्या ज्यादा परेशान करती है इससे राहत पाने के लिए ताड़ की जड़ के चूर्ण को पानी में मिलाकर पीस लें और थोड़ा गुनगुना करके नाभि पर लगा लें इससे काफी फायदा मिलेगा ।
  • लीवर की समस्या – अगर किसी को लीवर से संबंधित कोई भी विकार हैं, तो ताड़ के पेड़ के फल का रस का सेवन करना चाहिए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता हैं, और लीवर स्वस्थ रहता हैं।
  •  मूत्र रोग से संबंधित समस्या – अगर आपको मूत्र त्याग करने में कोई समस्या आ रही हैं, और आप को जलन हो रही हैं, तो आप को ताड़ के पेड़ के रस का सेवन मिश्री के साथ करना चाहिए इससे बहुत जल्दी राहत मिलती हैं। 

नुकसान

  •  अगर आप ताड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं अर्थात ताड़ के पेड़ के तने के रस का इस्तेमाल कर रहे हैं और आपको खांसी की समस्या है या सांस से संबंधित कोई भी समस्या है तो आपको इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए यह बहुत ही नुकसानदायक साबित हो सकता है।

ताड़ के पेड़ के उपयोगी भाग कौन-कौन से हैं?

  1. ताड़ के पेड़ का पत्ता 
  1. ताड़ के पेड़ की जड़ 
  1. ताड़ के पेड़ का फल
  1.  ताड़ के पेड़ के फूल
  1.  और ताड़ के पेड़ के तानो का रस

इन सभी को उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

ताड़ के पेड़ के भागों का इस्तेमाल किस प्रकार से और कितनी मात्रा में करना चाहिए?

सर्वप्रथम किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी होता हैं। आइए जानते हैं कितनी मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए  –

  • रस – ताड़ के रस का उपयोग लगभग 20 से 40ml ही करना चाहिए उससे अधिक नुकसानदायक हो सकता हैं।
  • चूर्ण – ताड़ के पेड़ से बने चूर्ण का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता हैं। इसकी मात्रा लगभग 2 से 3 ग्राम होनी चाहिए उससे अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने से यह हमें नुकसान भी दे सकता है।

निष्कर्ष 

हमने आपको Taad ka ped के बारे में बहुत सारी जानकारी दीं। आशा करते हैं कि आपको ताड़ के पेड़ से जुड़ी जानकारियां आपके लिए उपयोगी साबित हुई होंगी। जितना Taad ka ped उपयोगी है उतना ही उसके भागों को भी उपयोग में लाया जाता हैं। इसके तेल का उपयोग भारत में ज्यादा नहीं किया जाता हैं। बहुत ही कम लोग ताड़ के तेल के बारे में जानते होंगे हमने आपको हमारी इस पोस्ट Taad ka ped में ताड़ के तेल के बारे में भी जानकारियां दी हैं।

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