August 15, 2022
Cheed ka ped

Cheed ka ped एक बहु उपयोगी पेड़ है जिसका आर्थिक रूप से उतना ही महत्व है जितना कि आयुर्वेदिक रुप से। Cheed ka ped का उपयोग बहुत सारी चीजों के निर्माण में किया जाता है इसकी लकड़ियां बहुत ही मजबूत होती है और इससे प्राप्त गोंद का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

परिचय

Cheed ka ped आकार में पिरामिड की तरह होता है यह कम उम्र के पौधे होते हैं। यह पृथ्वी से सीधा से जुड़ा हुआ होता है। इसकी कुछ शाखाये अधिक दूरी तक फैली हुई होती है और कुछ कम दूरी तक फैली होती है। जैसे-जैसे बढ़ती जाती है इनका आकार पिरामिड से बदलकर गोलाकार हो जाता है। जंगलों में जो Cheed ka ped जिनकी शाखाएं जल्दी गिर जाती है। फिर इसका तना एकदम सीधा स्तम्भ की तरह दिखाई देता है।

Cheed ka ped की टहनियां दो प्रकार की होती है।

  • लंबी टहनियां – लंबी टहनियों में शल्कपत्र लगे हुए होते हैं।
  • छोटी टहनियां – इनकी पत्तियों गुच्छो के समान लगी हुई थी जिनका आकर सुई की तरह होता है यह नुकीली भी होती है इतना जल्दी ही पीली होकर गिर जाती है।

जब Cheed ka ped बड़ा हो जाता है तो इसकी पत्तियां सालों साल तक नहीं गिरती है सदा हरी भरी रहती हैं। 1 पत्तियों के गुच्छा में लगभग 7 से 8 पत्तियां होती है।

Cheed ka ped नर और मादा शंकु से युक्त होता है यह वर्षा ऋतु में एक ही पेड़ में नर और मादा शंकु या कोन आते हैं।

  1. नर शंकु – नर शंकु सामान्यतः 1 इंच से भी छोटे होते हैं इनका रंग कत्थई या फिर पीले रंग का होता है इसमें मिक्रोपोर्नगिया ( द्विकोषीय लघु बीजाणुधानियाँ ) होता है। शंकु में परगकणो के सिरे खुले हुए होते हैं जो हवा में उड़ कर दूर चले जाते हैं।
  1. मादा शंकु – मादा शंकु लगभग 4 इंच से लेकर 19 20 21 इंच तक लंबी होती है। इसमे बीज पक जाने के बाद शंकु खुल जाते है और यह हवा में उड़ जाते हैं। और यदि शंकु नही खुलते हैं तो भूमि पर गिर जाते हैं।

Cheed ka ped कितने प्रकार का होता है?

Cheed ka ped दो प्रकार का होता है कोमल चीड़ का पेड़ और कठोर चीड़ का पेड़।

  1. कोमल Cheed ka ped – कोमल चीड़ का पेड़ सफेद रंग का होता है जिसे हैप्लोज़ाइलॉन भी कहते हैं। इसमें पत्तियों के गुच्छों में केवल चार से पांच पत्तियां ही होती है उससे कम भी होती है इसकी बसंत ऋतु और सूखे मौसम की लकड़ियों में ज्यादा अंतर नहीं होता है।
  1. कठोर Cheed ka ped – कठोर चीड़ का पेड़ पीले रंग का होता है डिप्लोज़ाइलॉन भी कहते हैं। इसकी लकड़ियां ज्यादा मजबूत होती है और इसकी लकड़ी बसंत ऋतु और सूखे ऋतु की लकड़ियों में काफी अंतर होता है।

उपयोग

Cheed ka ped का उपयोग बहुत सारी चीजों के निर्माण में किया जाता है आर्थिक महत्व से इसकी लकड़ी में बहुत ही महत्वपूर्ण और उपयोगी है आइए जानते हैं कैसे – 

  • पुल निर्माण में चीड़ के पेड़ की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है।
  • बड़ी-बड़ी इमारतों को बनाने के लिए भी इसकी लकड़ियों को क्योंकि माना जाता है।
  • कुर्सी टेबल इमेज खिलौने आदि बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है।
  • रेलगाड़ी की पटरी ओं के लिए चीड़ की लकड़ियों का ही इस्तेमाल किया जाता है।
  • कोमल चीड़ की लकड़ी और से तारपीन का तेल और गंधरान बनाया जाता अथवा निकाला जाता है।
  • कोमल चीड़ का पेड़ की लकड़ी को काटकर उसका पाइन ऑयल तार का तेल और कोयला बनाया जाता है।
  • चीड़ के पेड़ की कुछ जातियों की पत्तियों से पाइन आयल बनाया जाता है जिसका औषधीय महत्व बहुत होता है।
  • इसकी पत्तियों के रेशों से चटाई का निर्माण किया जाता है।
  • चीड़ के पेड़ की कुछ जातियों की सजावट के तौर पर बगीचों में लगाया जाता है।

क्या चीड़ के पेड़ की बीमारियां होती है?

चीड़ के पेड़ की बीमारियां अर्थात चीड़ के पेड़ में फफूंद पाए जाते हैं जिससे वह पेड़ को खराब कर देते हैं यह दो प्रकार के होते हैं।

  1. सफेद चीड़ ब्लिस्टर रतुआ – (White pine blister rust) – इस बीमारी में एक फफूंद पाया जाता है जिसका नाम क्रोन क्रोनारटियम रिबिकोला (Cronartium ribicola) है। इस फफूंद से की वजह से के पेड़ की छाल सबसे ज्यादा प्रभावित होती है जिससे वह नष्ट हो जाता है।
  1. आरमिलेरिया जड़ सड़न (Armillaria root rot) – इस रोग में एक गिल (Armillaria melia) नामक फफूंदी होती है जो जड़ को सड़ा देती है और जड़ को पूरी तरह से चढ़ा देती है और फिर उसे नष्ट कर देती है।

औषधीय गुण

चीड़ के पेड़ की गोंद एक औषधि की तरह काम करती है चीड़ के पेड़ की लकड़ी या छाल आदि का उपयोग भी औषधि के रूप में किया जाता है इससे कई बीमारियों का उपचार होता है।

  • कान के रोग की समस्या – होने वाले रक्त स्त्राव या फिर सूजन दर्द से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको देवदारू, कुठ और सरल कोष्ठों पर क्षोम लपेटकर उसे तिल के तेल में भिगोकर उसे जला दें जलाने से मिलने वाले तेल एक दो बूंद कान में डालें इससे कान का दर्द ठीक हो जाएगा।
  • मुंह के छालों की समस्या – चीड़ के पेड़ की गोंद का काढ़ा बनाकर उसका सेवन करने से मुंह के छालों की समस्या जल्दी दूर हो जाती है।
  • पेट के कीड़ों की समस्या – पेट के कीड़ों को मारने के लिए चीड़ के तेल का आधा भाग विडंग चावल का चूर्ण बनाकर उसमें मिला दे फिर उसे धूप में रख दें उसके बाद इसका सेवन करें इसे पीने से पेट के कीड़े मर जाएंगे।
  • पेट फूलने की समस्या – चीड़ के तेल की मालिश पेट में करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है और बाबासीर जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है।
  • लकवा की समस्या – लकवा का इलाज करने के लिए आपको पिप्पली और पिप्पली की जड़ को सरल और देवदारू के साथ मिलाकर इसका पेस्ट बना लें इसके पेस्ट को लगभग 2 ग्राम की मात्रा में 2 गुना ज्यादा शहद मिलाकर इसको पीने से लगा जल्दी ठीक हो जाता है।
  • घाव जल्दी भरने में मदद करें – चीड़ के पेड़ की गोंद इसका गांव में लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं और उसका दर्द भी कम हो जाता है।

निष्कर्ष

Cheed ka ped बहुत ही उपयोगी है इसका इस्तेमाल बहुत सारी चीजों में किया जाता है खिलौने बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है उससे जो गोंद प्राप्त होती है उसके इस्तेमाल से बहुत सारे रोगों को दूर किया जा सकता है लेकिन इसका इस्तेमाल चिकित्सक के परामर्श से ही करें आशा करते आपको हमारी यह पोस्ट Cheed ka ped पसंद आई होगी।

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